
हैलो एवेरीबडी! वेलकम बैक टू माय ब्लॉग... बजरंगबली का वार आप सभी को शुभ हो .. आज का दिन बड़ा गहमा -गहमी में कटा। कारण आप सब को मालूम ही है, 'हाँ जी ' आप सही समझे- आज हम सभी पश्चिम वासी अपने नागरिक होने का फ़र्ज़ अदा कर रहे हैं। उम्मीद करता हूँ कि आप सभी ने पूर्ण कैलकुलेशन करके ही अपनी भागीदारी निभाई होगी। आगे माता रानी की मर्ज़ी। ..
आप सब को तो मालूम ही है की मैं काऊ मिल्क ही लेता हूँ, तो सुबह सबसे पहले वही लेकर आया। जब तक मिल्क लेकर आया तब तक अदरक, हरी इलायची, व लौंग की गरमा- गरम चाय तैयार हो चुकी थी। उसके बाद हम अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए निकले, सपत्नीक अपना फ़र्ज़ अदा किया। लाइन ज्यादा लंबी नहीं थी बिकॉज़ हम लोग अर्ली मॉर्निंग ही आधार कार्ड लेकर निकल लिए थे। लेडिज तो बस दो ही खड़ी थी लाइन में, जेंट्स दस -बारह थे। सो मुझको थोड़ा टाइम लगा, मेरी वाइफ मुझसे पहले घर पहुच गयी थी। हमारा घर दो कदम की दूरी पर है गंतव्य से ।
आज आपको अपनी यादों के गलियारे में ले जाने का बड़ा मन कर रहा है। ये बात उन दिनों की है जब हम सातवी - आठवी कक्षा के बच्चे थे। घूमने का बड़ा शौक था, अपने मोहल्लै के यार - दोस्तों के साथ घूमने निकल पड़े। सबने अपनी - अपनी टू व्हीलर ले लिए थे, एक -दूसरे से होड़ लगाते हुए हम लोग काफी दूर निकल लिए थे। तब न तो इन्टरनेट हुआ करता था, ना ही मोबाइल फ़ोन का ज़माना था, और ये बताते हुए हर्ष सा महसूस होता है कि ना हीं केबल टीवी या डिश एंटीना हुआ करता था। एक ही चैनल था जिसे बार- बार छत लगे एंटीने को ठीक करके पिक्चर को लाना पड़ता था। सब इकट्ठे होकर ग्रुप में हफ्ते में एक दिन शाम को पिक्चर देखा करते थे, हफ्ते में एक दिन इसलिए क्यूंकि टीवी ही हफ्ते में एक बार आया करता था !
आज का टिप = पानी हमेशा बैठकर पीजिये इससे कभी घुटनो में दर्द नहीं होता।आप सब को तो मालूम ही है की मैं काऊ मिल्क ही लेता हूँ, तो सुबह सबसे पहले वही लेकर आया। जब तक मिल्क लेकर आया तब तक अदरक, हरी इलायची, व लौंग की गरमा- गरम चाय तैयार हो चुकी थी। उसके बाद हम अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए निकले, सपत्नीक अपना फ़र्ज़ अदा किया। लाइन ज्यादा लंबी नहीं थी बिकॉज़ हम लोग अर्ली मॉर्निंग ही आधार कार्ड लेकर निकल लिए थे। लेडिज तो बस दो ही खड़ी थी लाइन में, जेंट्स दस -बारह थे। सो मुझको थोड़ा टाइम लगा, मेरी वाइफ मुझसे पहले घर पहुच गयी थी। हमारा घर दो कदम की दूरी पर है गंतव्य से ।
आज आपको अपनी यादों के गलियारे में ले जाने का बड़ा मन कर रहा है। ये बात उन दिनों की है जब हम सातवी - आठवी कक्षा के बच्चे थे। घूमने का बड़ा शौक था, अपने मोहल्लै के यार - दोस्तों के साथ घूमने निकल पड़े। सबने अपनी - अपनी टू व्हीलर ले लिए थे, एक -दूसरे से होड़ लगाते हुए हम लोग काफी दूर निकल लिए थे। तब न तो इन्टरनेट हुआ करता था, ना ही मोबाइल फ़ोन का ज़माना था, और ये बताते हुए हर्ष सा महसूस होता है कि ना हीं केबल टीवी या डिश एंटीना हुआ करता था। एक ही चैनल था जिसे बार- बार छत लगे एंटीने को ठीक करके पिक्चर को लाना पड़ता था। सब इकट्ठे होकर ग्रुप में हफ्ते में एक दिन शाम को पिक्चर देखा करते थे, हफ्ते में एक दिन इसलिए क्यूंकि टीवी ही हफ्ते में एक बार आया करता था !
आप सभी का धन्यवाद मेरी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए, आपसे मैं फिर अगली पोस्ट में मिलता हूँ।
God Bless You ....
कुछ पंक्तियाँ = ये बेफिक्री सी सुबह कुछ यूँ भी हँसी है
अगर आदत हो सब कुछ भूल कर बेवज़ह मुस्कराने की ।
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