Saturday, July 30, 2011

MANSA DEVI (HARIDWAR)



मैं मनसा देवीजी,अपनी फॅमिली के साथ गया था,हम दोपहर को कोई तीन बजे,हरिद्वार पहुचे थे|गाडी अगर शहर की तरफ से निकलवा लो मनसा देवीजी जाने के लिए,तो ठीक रहता है,अगर बहार से ले लो तो बहुत मुश्किल पड़ती है |सब कुछ दूर तक तो पैदल गए,रास्ते मै बहुत सी शॉप थी रंग -बिरंगी लेडिज़ और बच्चो के लिए रोकने का काफी आईटम वहां मौजूद था |

मेरी फॅमिली अभी तो सिर्फ देखते हुएय ही जा रही थी,और क्या -क्या लेना है,इसका सबने पहले ही तय कर लिया|उसके बाद मैने सबके लिए ट्रोली के टिकेट लिए,हम चारो एक ही ट्रोली मै आ गए थे |मंदिर मै पहुचे,मै वैसे बहुत ही कम मंदिर जाता हूँ,पर जब भी जाता हूँ तो बहुत ही दिल लगा कर,प्रार्थना करता हूँ |हमने माँ के लिए प्रसाद ले लिया था,जो मंदिर के प्रांगड मे ही मिलता है |जिस टाइम मे गया था,तब वहां रश नहीं था |वहां नवरात्रों  के दिनों मे बड़ी भीड़ रहती है|''माँ'' की बहुत ही अद्भुत प्रतिमा है,कहते हैं की ''मनसा देवी मनसा पूरी करती पहली बार मे'' मैने और मेरी फॅमिली ने तो कुछ माँगा नहीं|क्युकी मेरी और मेरी फॅमिली की तो यही सोचती है की ''भगवान् तो सब जानते हैं,उनसे क्या मांगना''     
                  
वहां और भी छोटे- छोटे मंदिर बने हैं,हमने सभी जगह मत्था टेका था|मेरठ से हरिद्वार बहुत ही पास है,साल मे एक बार वहां जरुर जाता हूँ अपनी फॅमिली के साथ| उसके बाद हम वापस ट्रोली से नीचे आ गए,और फिर शौपिंग स्टार्ट हो गयी,मेरी फॅमिली की..........     


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