Wednesday, February 8, 2012

A VISIT TO ''JBALPUR''



                                                          ''जबलपुर''
मध्य प्रदेश   का  प्रमुख  जिला, जबलपुर  जहाँ  अपनी  साहित्यक  एवं  गतिविधियों  के  लिए  प्रसिद्ध  है । वहीँ  संगमरमरी  चट्टानों  के  बीच कलकल  कर  बहती  ''नर्मदा''  के  यादगार  द्रश्यों  के  लिए,  विश्व  भर  के  पर्यटकों  के  लिए  आकर्षण  का  केंद्र  है  ।गौंड  राजाओ  की  कर्मभूमि  रहा  जबलपुर  ''जाबाली ऋषि'' की  तपोभूमि  रहा  है, उनके  नाम  पर  ही  इसका  नाम  जबलपुर  पड़ा । चारों  और  पहाड़ियों  से  घिरे  होने  के  कारण  यहाँ  का  पर्यावरण  भी  सुरक्षित  हैं, कहते  हैं  जबलपुर  को  कलचुरी  राजा  जाजल्यदेव  ने  बसाया  था ।कलचुरी  नरेश  कर्णदेव  ने  अपनी  रानी  के  सम्मान  में  इसका  नाम  जाबलिपित्तम  रखा  था ।

इतनी  सब  जानकारी  मुझे  यहाँ  के  बारे  में  किसी  किताब  से  नहीं  मिली  है , ''मेरे  पापा  गवर्मेंट  जॉब  में  थे''  और  यहाँ  पोस्टेड  थे । इसीलिए  मुझे  यहाँ  रहने  का  सौभाग्य  प्राप्त  हुआ , हम  करीब  तीन  साल  यहाँ  रहे, तब  में  कोई  सिक्स्थ क्लास  का  स्टुडेंट  हुआ  करता  था । यादें  धूमिल  नहीं  हुई  हैं  ,वरन  आज  भी  उतनी  ही  ताज़ी  हैं  जितनी  उस  वक़्त  हुआ  करती   थी ,जब  में  वहां  पढ़ा  करता  था।

वहां  बहुत  सी  जगह  देखने  लायक  हैं , भेड़ाघाट - नीली  गुलाबी  और  सफ़ेद  संगमरमर  की  चट्टानों  के  बीच  से  बहने  वाली  नर्मदा  नदी   का  प्राक्रतिक  सौन्दर्य  अप्रितम   है ।  धुआधार  जलप्रपात -अत्यंत  ऊँची  पहाड़ियों  से  जब  नर्मदा  का  जल  नीचे  गिरता  है , उसका  वेग  इतना  तीव्र  होता  है  की  पानी  धुए  के  रूप  में   चारों  और  छा  जाता  है ।

मदन महल  किला ,शहीद स्मारक ,लम्हेटा घाट ,रानी दुर्गावती संग्राहलय आदि  देखने  लायक  चीज़े  यहाँ  पर  हैं । स्कूल टूर   से  मम्मी  -पापा  के  साथ ,और  सच  बताओ  कभी- कभी  छुप  कर  दोस्तों  के  साथ  आ  जाया  करता  था  । हम  सब  खूब  मस्ती  किया  करते  थे,  अन्ताक्षरी  खेलना ,अपने  आप  में  खोये  रहना ............... :)   
 चलते- चलते =



Monday, January 16, 2012

meri yatra ''Shakumbhri Devi''

 
आज  सुबह  ही  मेरा  अपनी  फॅमिली  के  साथ  शाकुम्भरी देवी जी  जाने  का  प्रोग्राम  बना | रूडकी  से  शाकुम्भरी देवीजी  का  रास्ता   है,रोड  ख़राब  होने  की  वज़ह  से   रूडकी  से  तीन  घंटे  लगे  शाकुम्भरी जी पहुचने में | सडक  इतनी  ख़राब  थी  की, छोटे बच्चो  के  साथ  -साथ  हम  बड़ो  की  भी  हालत  पूरी  तरह  से  खस्ता  हो चुकी  थी !!!

शाकुम्भरी जी  से  पहले  ''भूरा देव जी''  की  पूजा  की  जाती  है, पहले  'सपरिवार'  मैने  वहां  पर  माथा  टेका ,लम्बी  लाइन  में  लगने   के बाद  हमारा  नंबर  आया  था  | फिर  हम शाकुम्भरी जी  के  दर्शनों  के  लिए आगे  बढे, लाइन  वहां  पर  भी  काफी  लम्बी  लगी  थी,बिलकुल ''वैष्णो देवी जी '' की तरह लाइन  लगी  थी,6-7 घंटो  से  पहले  नंबर  आने  के  कोई  आसार  नज़र  नही  आ  रहे  थे |!!

हम  लाइन  में  खड़े  रहे, आखिरकार  'देवीजी' की  की  असीम  कृपा  हुई  और  मुझे  अपने  परिवार  के  साथ  देवीजी  के  दर्शनों  का  सोभाग्य  प्राप्त  हुआ | शाकुम्भरी जी   की  मूर्ति  स्वयंभू  है, स्वयं ही  अपनी  भरपूर कृपा  बरसा  देती  हैं |  ''जय माता दी''               ''जय माता दी''               ''जय माता दी''