''Happy kite festival & maa saraswati puja'
दोस्तों सबसे पहले तो आप सबको ''बसंत पंचमी'' की बहुत - बहुत शुभकामनाये। माँ सरस्वती आप सब पर अपनी ब्लैसिंग्स का शावर ऑन कर दे । मॉर्निंग तो आप सबको मेरी पता ही है, आज डेली रूटीन थोड़ा हट कर था। अरे ! नहीं भाई ऐसा कुछ भी नही है जैसा आप सोच रहे हैं :) दरअसल , बड़ी doughter की आज छुट्टी थी so थोड़ा ज्यादा सोने का टाइम मिल गया सवेरे में। आज में आठ बजे सो कर उठा, बच्चे बोले पापा आपको बोलना चाहिए 'yaaaaaayyyy yeeepieee ' में बस मुस्करा कर रह गया और नीचे 'गर्म बनियान ' पहनते हुए सोचा की चलो दिन की शुरुआत तो बढ़िया ही हुई है ।
छोटी daughter का स्कूल timing 9 am से है तो उसको ड्रॉप किया। हमारी कॉलोनी में बसंत की शानदार शुरआत हो चुकी थी, सुबह में पांच बजे से ही डेक बजने चालू हो गए थे फुल वॉल्यूम पे और ''वो काटा , वो काटा '' की आवाज़ आ रही थी। मगर में फिर भी 'घोड़े बेच कर सोता रहा।' आप सब सोच रहे होंगे की फिर ये सब कुछ मुझको कैसे पता ? मेरी'' वामांग '' ने बताया था। पतंग तो दोनों गुड़ियों को मैंने भी लेकर दी थी, साथ ''कच्चे मांझे'' की रील भी लेकर दी थी, मैंने तो कभी पतंग उड़ाई नहीं है, बच्चो को शौक है पतंगों का तो। .. हालाँकि उड़ानी उनको भी नही आती बस उसमे धागा बांध कर भगति चली जाती हैं और पीछे- पीछे पतंग उड़ती रहती है । :) :)
अरे ! ये तो मैंने आपको बताया ही नहीं की हमारे यहाँ बसंत को ही पतंग उड़ने का रिवाज़ है। प्रत्येक नागरिक, (''किसी भी तरह की दीवार पतंग को उड़ने के बीच में नहीं आती '') हमारे यहाँ इस काइट फेस्टिवल को मनाता है, पूरा शहर रंगबिरंगी पतंगों से पट जाता है । मेरी बी हाफ ने सुबह ''माँ सरस्वती को बसंती चावलों का भोग लगाया था '' ये केसरी चावल मीठे होते हैं जिनको केसर डाल कर बनाते हैं । फिर हम सबने प्रसाद को ग्रहण किया, भोग बहुत अच्छा बना था, मैंने दो बार लिया। वैसे तो उस ''सुपर पावर '' के लिए जो भी भोग बने अद्भुत स्वाद का होता है, जब मैं छोटा था तो ये सोचता था की भोग में इतना टेस्ट कहाँ से आता है !
मेरी छोटी गुड़िया जब घर आयी स्कूल से तो उसने बताया की आज स्कूल में लंच टाइम में पतंग उड़ाई। स्पोर्ट्स सर सबको पतंग उड़ा - उड़ा कर दे देते और बच्चे डोर पकड़ लेते थे। वो बोल रही थी की पापा बहुत nice एक्सपीरिएंस रहा, ये स्कूल डेज बड़े होकर बड़े याद आते हैं, ये हमारी ऐसी 'अनफॉर्गेटेबले मेमोरीज' होती हैं जो जरा भी किसी बच्चे को स्कूल यूनिफॉर्म में देखकर उठ खड़ी होती हैं ।
मैंने अपने बच्चों की सभी स्कूल और फ्रेंड्स की यादों को संभल के रखवा रखा है, उन्हें अभी तक मिले कार्ड्स , सर्टिफिकेट , गिफ्ट्स नोट बुक जिसमे सब से अच्छे रिमार्क मिले हैं मैम से, उनकी फर्स्ट ड्रॉइंग, सभी संजो कर रखे हैं। कभी दिल उदास हो, किसी दोस्त या मेम की याद आये- झट से यादों के गलियारे में पहुच जाओ उन संजो कर रखे कीमती यादों के द्वारा। आप भी सभी यादों को एक बॉक्स या तो किसी अलमारी में संजो रख लीजिये, बस यही मेरा आज का टिप है ।
धन्यवाद दोस्तों। खूब एन्जॉय करिये, मस्त रहिये और स्वस्थ रहिये। मिलता हूँ आपसे अगली पोस्ट में ।
कुछ मशहूर पंक्तियाँ = दिन जो पखेरू होते पिंजरे में मैं रख लेता
पालता उनको जतन से मोती के दाने देता
सीने से रहता लगाए ।